राजाओं-नेताओ के खाने में जहर की टेस्टिंग का इतिहास रहा है, ममता बनर्जी के मोदी को खाने की पेशकश के बाद मुद्दा बना

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Reported by Pankaj Yadav

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Food tester For Leaders: कुछ वर्ष पूर्व ही तुर्की के प्रेसिडेंट रेचेप तैयप एर्डोगन का बयान था कि प्रेसिडेंट बिल्डिंग में एक लैब स्थापित करेंगे जोकि प्रेसिडेंट एवं मेहमानो के भोजन के जहर की चेकिंग का काम करेगी। इस बात को लेकर बहुत शोर भी हुआ था किंतु इस आदेश के पालन होने की कोई न्यू नही आई। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने पीएम मोदी को उनके हाथ से बने खाने को खाने का प्रस्ताव दिया है। वो यह भी कहती है कि क्या पीएम मोदी उनके बनाए गए खाने पर “विश्वास” कर पाएंगे।

आज की सियासत को छोड़े तो पहले के जमाने में भी राजाओं के पास एक व्यक्ति रहता था जोकि उनके भोजन की चेकिंग का काम करता था। मॉडर्न दौर में विश्वभर के नेताओ ने भी इसी प्रकार के काम किए। वर्तमान समय में ये काम बंद हो चुका है अथवा गुपचुप तरीके से चल रहा है।

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ममता बनर्जी से जुड़ा है मामला

TMC मुखिया एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तरफ से पीएम मोदी को खाने की पेशकश हुई है। ममता कह रही थी कि वो उनके (मोदी) के लिए कुछ पकाने को तैयार हूं, यदि वो चाहे तो…वैसे उनको भरोसा नहीं है कि वो जो पकाएगी, उसको वो खायेंगे भी अथवा नहीं। भाजपा ने जनता के खाने पीने पर कथित रूप से हस्तक्षेप किया है और इस बात को लेकर ही मुख्यमंत्री ने यह सब बात कही है।

राजाओं के खाने की चेकिंग

राजशाही के दौर में शाही परिवारों में खाने को टेस्ट करने वाले होते थे। यह एक पूरा ग्रुप हुआ करता था जोकि इन शाही परिवारों को खाने चखकर यह सिद्ध करता था कि इसमें कोई जहर मिला है अथवा नहीं। फिर प्रसिद्ध नेताओ ने भी इसी प्रकार का सिस्टम लेना शुरू कर दिया। काफी सारी मीडिया की रिपोर्ट दावे करती है कि करीबन सभी देशों के नेता, जिनको अन्य दुश्मन देशों अथवा विरोधी राजनेताओं से भय हो वो गुप्त तरीके से फूड के टेस्टर रखा करते थे।

रोमन साम्राज्य से हुई शुरुआत

विदेशों में कप-बियेयर रहते है जोकि व्हिस्की अथवा अन्य पीने की चीजों को टेस्ट करके जानते है कि इसमें जहर है अथवा नहीं। ये एक चम्मच में ग्लास से वो चीज लेटकर टेस्ट करते है जिससे ग्लास झूठा भी न हो सके। वैसे इस काम को राजा अथवा लीडर के सामने करते है जिस वे विश्वास कर पाए। खाने को टेस्ट करने वालो की शुरुआत रोमन साम्राज्य से कही जाती है। 54 AD के समय पर राजा क्लोडियस के यहां स्टाफ था जोकि पूरे दिन इसी कार्य को करता रहता था। खास बात थी कि अंत में किंग भोजन में जहर से ही मरा था चूंकि टेस्टर स्टाफ ने धोखा दिया था।

हिटलर के पास दर्जनों टेस्टर थे

जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर तो खाने के टेस्टरो की एक भीड़ रखते थे। विश्व युद्ध के समय पर 15 यहूदी लड़के-लड़की इसी कार्य को रखे गए थे कि वो हिटलर के भोजन में से जहर की चेकिंग कर लें। यह लोग एक खास टाइम पर विभिन्न कमरों पर खाने की चेकिंग करते थे और फिर इन लोगो पर ध्यान देते थे। यदि 30 मिनट तक इनको कुछ नही होता तो इस फूड को ग्रीन सिग्नल मिल जाता था। फिर यह खाना डिब्बे में पैकिंग एवं सीलिंग के बाद मिलिट्री हेडक्वार्टर अथवा हिटलर के रहने के स्थान पर पहुंचाते थे।

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पुतिन के फूड टेस्टर की खबरे

कहते है कि रूसी प्रेजिडेंट व्लादिमीर पुतिन भी ऐसे ही टेस्टर रखते है किंतु इसको लेकर पुख्ता जानकारियां तो नही है। एक ब्रिटिश न्यूज पेपर ने इसको लेकर रिपोर्ट भी छापी थी कि क्रेमलिन के एक लीडर को राष्ट्र के बाहर एवं अंदर दोनो से ही डर है।

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