सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि से बैन हो चुकी दवाओं को बाजार से वापस लाने एवं बिक्री रोकने की प्लानिंग पूछी, सभी राज्य सरकारों को एक्शन लेने को कहा

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Reported by Pankaj Yadav

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Supreme Court On Patanjali: उच्चतम न्यायालय (SC) की तरफ से भ्रांति देने वाले विज्ञापनों के केस में सुनवाई के समय पर पतंजलि कंपनी को एक नया नोटिस दिया गया है। इसके अनुसार अदालत ने कंपनी से प्रश्न किया है कि उनकी जिस भी दवाई का लाइसेंस कैंसल हुआ है तो वो उनको मार्केट से किस प्लानिंग से वापसी लाने वाली है? अदालत के दौरा इस प्रश्न का उत्तर देने को 3 सप्ताह का टाइम ही मिला है।

बीते अप्रैल माह में उत्तराखंड के औषधि नियंत्रण डिपार्टमेंट के आईसेंसिंग अथॉरिटी के द्वारा पतंजलि की दिव्य फार्मेसी कंपनी में बनने वाले 14 उत्पादों के ऊपर प्रतिबंध लगाने की कार्यवाही हुई थी। बाबा रामदेव एवं बालकृष्ण के विरुद्ध अवमानना को लेकर उच्चतम न्यायालय में न्यायमूर्ति हिमा कोहली एवं अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ सुनवाई कर रही है। ये केस आगे जारी होगा या नहीं इस पर निर्णय सुरक्षित रखा है।

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पतंजलि को हलफनामा देने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी को हलफनामा डालकर बैन दवाइयो को वापस लाने एवं बेचने की रोकथाम पर कार्यवाही की जानकारी देने को कहा है। इसके पीछे कोर्ट ने अपना उद्देश्य जनता को अलर्ट करना कहा है। रामदेव में जनता की आस्था है और इसका उचित प्रयोग हो जैसे विश्वभर योग के फैलाव में दिया है। न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने हल्के तरीके से कंपनी के एडवोकेट से भी पूछा कि आपके मुवक्किल को थोड़े वर्षो पूर्व हार्ट अटैक की वजह से एम्स जाने की जरूरत पड़ी थी। उनका उत्तर था कि काफी एलोपैथिक चिकित्सक आयुर्वेद की दवाई पर डिपेंड करते है।

सभी राज्यों को कार्यवाही के आदेश दिए

अदालत की तरफ से भ्रामक विज्ञापनों के केस में सभी प्रदेश की सरकारों से भी सवाल किया गया है कि कौन से प्रदेशों ने हलफनामा दायर कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि हर एक प्रदेश सरकार को ध्यान देना है कि यदि कंप्लेंट आए तो एक्शन लेना है। यदि कंप्लेंट न हो तो भी ध्यान दें कि कही उत्पात भ्रामक एड वाला है अथवा नहीं।

अदालत के अनुसार सिर्फ पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से हलफनामा दायर किया गया है। नागालैंड ने पिछली रात्रि में ही हलफनामा दायर किया है। नयालय की तरफ से हर प्रदेश सरकार की लाइसेंस अथॉरिटी को उनके उत्तर देने का अंतिम अवसर भी दिया गया है। अब कोर्ट में 4 सप्ताह बाद सुनवाई होने वाली है।

आयुष विभाग एवं FSSAI हलफनामे देंगे

अदालत का कहना है कि यह नागरिकों की सेहत का केस है। सरकार ने भ्रामक विज्ञापन पर लिए एक्शन की डीटेल्स को देनी है। FSSAI की ओर से भी हलफनामा नही दायर हुआ है। उपभोक्ता मामले मंत्रालय को भी नए हलफनामे को दायर करने पड़ेगा। IMA अध्यक्ष ने भी अदालत से अंतिम अवसर की मांग की है।

अध्यक्ष के वकील से भी अदालत का प्रश्न था कि उन्होंने वह क्यों नही किया जोकि पतंजलि ने किया है? अदालत ने उत्तराखंड के आयुष डिपार्टमेंट से हलफनामे के विषय पर प्रश्न पूछे है। आयुष डिपाटमेंट की लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने भी अदालत से बेशर्त माफी मांग ली है। अदालत के मुताबिक विभाग ने एक्शन लेने में काफी देर की है और कोर्ट के साथ खेल न करने की भी बात कही है।

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पतंजलि की ये दवाईयां बैन हुई

दिव्य फार्मेसी की ये दवाएं बैन हो गई है श्वासारि गोल्ड, श्वासारि वटी, दिव्य ब्रोंकोम, श्वासारि प्रवाही, श्वासारि अवलेह, मुक्ता वटी एक्स्ट्रा पावर, लिपिडोम, बीपी ​ग्रिट, मधुग्रिट, मधुनाशिनी वटी एक्स्ट्रा पावर, लिवामृत एडवांस, लिवोग्रिट, आईग्रिट गोल्ड और पतंजलि दृष्टि आई ड्रॉप शामिल हैं।

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